छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की जमीन बेचने का क्या होगा नया नियम , जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर…

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल (CM Bhupesh Baghel) की सरकार राज्य में आदिवासियों की जमीन बेचने के नियम में बदलाव करने जा रही है। यानी आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासी समुदाय के व्यक्ति को बेचने के नियम में बदलाव किया जाएगा। छत्तीसगढ़ राज्य जनजातीय सलाहकार परिषद की बीते दिनों हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में इसके लिए उप समिति गठित करने का फैसला भी हुआ। इसके अलावा परिषद ने अचानकमार टाइगर रिजर्व (Tiger Reserve) के गांवों के लोगों के विस्थापन के संबंध में भी निर्णय लिया। बताया गया कि टाइगर रिजर्व के तिलईडबरी, बिरारपानी और छिरहट्टा गांवों के लोगों को 10 लाख रुपए या 2 हेक्टेयर जमीन और 5 हजार वर्गफीट की बाड़ी दी जाएगी।

क्यों पडी इसकी जरूरत

भूपेश बघेल सरकार ने तिलईडबरी, बिरारपानी, छिरहट्टा जिले में 21 नए हॉस्‍टल बनाने के लिए संरक्षित आदिवासी जमीन बेचने का फैसला किया है ।  छत्तीसगढ़ राज्य जनजाति सलाहकार परिषद की बैठक मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हुई थी। इसमें अचानकमार टाईगर रिजर्व में आने वाले तीन गांवों तिलईडबरी, बिरारपानी, छिरहट्टा से लोगों के विस्‍थापन पर मुहर लगाई गई थी। साथ ही प्रत्‍येक विस्‍थापित परिवार को 10 लाख रुपए या दो हेक्टेयर भूमि और 5000 वर्गफीट की बाड़ी बतौर मुआवजा देने का फैसला किया गया। बता दें कि मौजूदा नियमों के अनुसार आदिवासियों की जमीन किसी गैर आदिवासी को नहीं बेचा जा सकता है। अब इस नियम में बदलाव करने के बाद आदिवासी जमीनों को बेचा जाएगा।

रायपुर स्थित सीएम आवास में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई जनजातीय सलाहकार परिषद की बैठक में जाति प्रमाण पत्र जारी और कैंसिल करने की प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई। साथ ही बैठक में अगले शैक्षणिक सत्र से नए हॉस्टल बनाने को भी मंजूरी दी गई। परिषद ने शैक्षणिक सत्र 2020-21 में 21 नए हॉस्टल बनाने को भी मंजूरी दी। इन हॉस्टलों में 14750 सीटों को स्वीकृति दी गई है। परिषद की बैठक में आदिवासियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार संबंधी समस्याओं को दूर करने पर बल दिया गया।