शिक्षक अरुण की जिद ने अतिसंवेदनशील गांव को बना दिया “एजुकेशन विलेज”

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पखांजुर से बिप्लब कुंडू की रिपोर्ट

पखांजुर। जिद और अथक प्रयास ने अतिसंवेदनशील गांव को बना दिया “एजुकेशन विलेज”। शिक्षा का ऐसा अलख जगाया कि छात्रों के साथ-साथ बदल डाली गाँव की तस्वीर । जानिए एजुकेशन हब बन चुके गोंडाहूर के शिक्षक अरुण कीर्तनिया के सफलता और संघर्ष की पूरी कहानी ।

कहते है “शिक्षक दीपक की तरह होते है जो खुद जलकर दूसरो के जीवन को रौशन करते हैं” इस कथन को चरितार्थ करके दिखाया है कोयलीबेड़ा ब्लॉक के ग्राम गोंडाहूर के शिक्षक अरुण कीर्तनिया ने । पखांजूर मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित अतिसंवेदनशील एक छोटा सा गाँव गोंडाहूर जहाँ एक शिक्षक के अथक मेहनत और प्रयास से इस छोटे से गाँव को आज एजुकेशन हब बना दिया है । जहाँ कुछ साल पहले लोग शिक्षा से कोसों दूर हुआ करते थे वही आज हर दूसरे घर का बच्चा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होकर शिक्षा के क्षेत्र नए आयाम छू रहे है। शिक्षक अरुण कीर्तनीया एक ऐसा नाम जिन्होंने इस गाँव में शिक्षा का ऐसा अलख जगाया कि पूरा गाँव शिक्षा की रौशनी से जगमगा उठा । शिक्षक अरुण कीर्तनिया ने शिक्षा के प्रति अपने समर्पण भाव से गोंडाहूर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के साथ-साथ पुरे गाँव की भी तस्वीर बदल दी है।


1997 से संभाली है स्कूल की जिम्मेदारी-


वक़्त था 08-12-1997 का जब अरुण कीर्तनीया को प्रभारी प्रिंसिपल के रूप में स्कूल की कमान सौपी गयी थी तब गांव में शिक्षा का स्तर और स्कूल की स्थिति दोनों ही अत्यंत दयनीय थी पर एक शिक्षक के रूप में अरुण कीर्तनीया ने स्कूल और गाँव दोनों की स्थिती सुधारने की ठान ली जिसका नतीजा ये हुआ कि आज गोंडाहूर स्कूल और गाँव दोनों ही बेहतरीन शिक्षा परिणाम के लिए पुरे क्षेत्र में चर्चित है।


राज्य में विद्यालय को दिलाया अलग पहचान-


धुर नक्सली क्षेत्र में स्थित यह विद्यालय जहाँ कभी पहुँचने के लिए न तो मार्ग थी और न ही वाहन की समुचित सुविधा । शिक्षा के नाम पर बस साक्षर होना भर ही लोगो का लक्ष्य था ऐसे में अरुण कीर्तनीया ने बच्चों और वहाँ के स्थानीय लोगो को बेहतर शिक्षा के प्रति जागरूक कर छात्रों को बेहतर से बेहतर शिक्षा पद्धति से दिन-रात मेहनत कर पढ़ाया और धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लायी और साल-दर-साल अपने बेहतर परीक्षा परिणाम से आज यहाँ स्कूल क्षेत्र में ही नहीं बल्कि पुरे प्रदेश में अपनी एक अलग पहचान बना चूका है।


गाँव की बदली तस्वीर और बन गया एजुकेशन विलेज-


कुछ साल पहले जिस गांव के लोगों में अशिक्षा का अंधकार हुआ करता था वह एक शिक्षक के साहस, मेहनत और समर्पण के चलते आज शिक्षा से इस प्रकार जुड़ चूका है कि अब क्षेत्र के लोग गोंडाहूर गाँव को “एजुकेशन विलेज” के नाम से जानने लगे है। एक शिक्षक के प्रयास ने पुरे गाँव की तस्वीर ही बदल दी है।


हर साल बढ़ता जा रहा है मेरिट का ग्राफ –


मुख्यालय से दूर लगातार असुविधाओं से जूझकर भी शिक्षक अरुण कीर्तनीया ने अपने सहयोगी शिक्षकों के साथ मिलकर दिन-रात मेहनत कर छात्रों को पढ़ाई के बेहतर तरीके और मोटिवेशन सिस्टम से जोड़ा और फिर शुरू हुआ मेरिट का ग्राफ जो आज हर शिक्षण सत्र परिणाम में ऊपर की और लगातार चढ़ता जा रहा है। कक्षा 12 वी में वर्ष 2010 में 90% से ऊपर में 6 छात्र ,वर्ष-2011 में 6 छात्र तथा वर्ष-2012 में 7 छात्र, वर्ष-2103 में 21 छात्रों को 80% से अधिक अंक प्राप्त हुए वही दूसरी और कक्षा 10 वी. में वर्ष-2011 में विद्युत मंडल ने 92.2% तथा वर्ष-2013 में प्रिया कीर्तनीया ने 93% अंक प्राप्त कर पुरे जिले में स्कूल का नाम रोशन कर चुके है और आज भी यहाँ हर साल कई छात्र मेरिट लिस्ट में शामिल होते है । शिक्षक अरुण कीर्तनीया के अथक प्रयास और उनकी बेहतर शिक्षा पद्धति ने गोंडाहूर विद्यालय को वर्ष 2010 में पुरे प्रदेश में चौथा स्थान दिलाया। वर्ष 2010 में समीर दत्त बनिक ने कक्षा 12 वी. में 95.8% अंक प्राप्त कर पुरे प्रदेश में चौथा स्थान हासिल किया था । जहां कभी अशिक्षा का अँधियारा हुआ करता था वहाँ से छात्र का पुरे प्रदेश में चौथा स्थान प्राप्त करना वाकई किसी आश्चर्य से कम नहीं था ।
इस विद्यालय ने दिए राज्य को कई होनहार और काबिल छात्र – इस विद्यालय के न सिर्फ परीक्षा परिणाम सबसे बेहतर होते है बल्कि इस विद्यालय ने अब तक प्रदेश को दर्ज़नो डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर, साइंटिस्ट , सेना और मल्टीनेशनल कंपनियों के उच्च पदाधिकारी भी दे चुके हैं ।


दाखिले के लिए उमड़ पड़ती है भीड़-


क्षेत्र में कई बड़े निजी स्कूल है जो मुख्यालय में ही स्थित है और जो विभिन्न प्रकार के सुविधाओं से लैस है वावजूद इसके अतिसंवेदनशील क्षेत्र में स्थित यह स्कूल आज पुरे क्षेत्र के लोगों की पहली पसंद है। पालकों द्वारा शिक्षण सत्र प्रारंभ होने से पूर्व ही अपने-अपने बच्चों के दाखिले के लिए कतार लगाई जाती है। दाखिले के लिए हजारो की संख्या में यहां बच्चे अपने पालकों के साथ आते है जिनका चयन छात्रों की गुणवत्ता के आधार पर होता है। शहरी इलाकों में कई निजी बड़े-बड़े स्कूल है वावजूद इसके बच्चे पढ़ाई के लिए इस दुर्गम स्थान पर स्थित स्कूल में आते है। बच्चे यहाँ किरायों के मकान में रहकर पढ़ाई करते है। आज एक शिक्षक के मेहनत और लगन ने गोंडाहूर के इस स्कूल को एक अलग पहचान दिलाया हैं ।
पीएटी-पीएमटी-पीईटी जैसे प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए छात्रों को दी जाती है निःशुल्क स्पेशल क्लासेस – जहाँ शिक्षण सत्र समाप्त होने के बाद सभी स्कूलों के शिक्षक छुट्टियां बिताते हैं वही इस विद्यायल के शिक्षक स्पेशल क्लासेस लगाकर छात्रों को प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए तैयार करते हैं । जिसमें पीईटी-पीएमटी-पीएटी जैसे कई प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए छात्रों को निःशुल्क कोचिंग दी जाती है । इन स्पेशल क्लासेस के द्वारा अब तक कई छात्रों का चयन विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं में हो चुका हैं । यहाँ के छात्र एनआईटी जैसे बड़े शिक्षण संस्थानों में भी अपना परचम लहरा चुके हैं ।


गाँव के कई परिवारों को मिला रोजगार-


इस गाँव के कई परिवारों को आज एक शिक्षक के मेहनत के चलते बेहतर रोजगार का विकल्प मिल गया है। दूर-दूर से पढ़ने आ रहे बच्चों के लिए किराये का मकान तथा भोजन उपलब्ध कराकर कई परिवार अपना जीवन-यापन कर रहे है। दूर-दूर से बच्चों के आने से यहां कई प्रकार की सुविधा जैसे एस.टी.डी ,कंप्यूटर सेंटर ,कई बड़े दुकान खोले जा रहे है जिससे इस गाँव के स्थानीय लोगों को बेहतर रोजगार मिल रहा है।


विद्यालय की साज-सज्जा देखने दूर-दूर से आते है लोग-


शिक्षक अरुण कीर्तनीया ने न केवल बच्चों के पढ़ाई पर ध्यान दिया बल्कि स्कूल के साज-सज्जा और उद्यानिकी का भी विशेष ख्याल रखा गया जिसके चलते आज इस स्कूल के उद्यानिकी और साज-सज्जा को देखने लोग दूर-दूर से आते है।


बन जाते है बच्चों के माता-पिता –


शिक्षक अरुण कीर्तनीया अपने छात्रों से बेहद लगाव रखते है और पढ़ाई के साथ-साथ उनके सुविधाओं का भी बखूबी ख़्याल रखते है। दूर-दूर से पढ़ने आये बच्चों के लिए वो कभी माँ तो कभी एक पिता बन जाते है। बच्चों की हर छोटी-छोटी बातो को समझकर बच्चों के परेशानियों का हल भी खुद ही निकालने की कोशिश करते है।


आदिवासी बच्चों के बीच जला रहे है ज्ञान की लौ –


इस विद्यालय में दूर-दूर से आदिवासी बच्चे पढ़ने आते है जिनका शिक्षक अरुण कीर्तनीया द्वारा विशेष ख्याल रखा जाता है। यह प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास भी है जिसमें कई आदिवासी बच्चें रहकर बेहतर शिक्षा प्राप्त कर अपने जीवन शैली को बेहतर बना रहे है । शिक्षा की दृष्टि से पिछड़े इन बच्चों के लिए विशेष कक्षा आयोजित कर इन छात्रों को सहज उपाय अपनाकर पढ़ाया जाता है जिससे इस विद्यालय के सुदूर अंचल के आदिवासी बच्चे भी शानदार प्रदर्शन करते हुए बेहतर परीक्षा परिणाम लाते है ।


लोगों के लिए बन चुके हैं आदर्श –


शिक्षक अरुण कीर्तनीया का छात्रों के प्रति प्रेम और समर्पण भावना लोगों के लिए एक आदर्श बन चूका है। छात्रों के मन में अपने शिक्षक के प्रति बेहद प्रेम और श्रद्धा है तथा छात्र अपने शिक्षक अरुण कीर्तनीया के आदर्शो को अपने जीवन में उतारना चाहते है । इनके मेहनत और लगन को देखते हुए अब क्षेत्र के कई शासकीय स्कूल इनके शिक्षा पद्धति को अपनाते हुए अपने स्कूलों के परीक्षा परिणामो को उत्कृष्ट बनाने की जी-तोड़ मेहनत कर रहे है।


छात्रों के लिए त्याग कर दिया आराम –


जहाँ एक ओर भीषण गर्मी में लोग अपने घरो में आराम फरमाते है वही दूसरी ओर बच्चों का भविष्य बनाने की जद्दो-जहत में अपने ग्रीष्मकालीन अवकाश के आराम को त्याग कर बोर्ड कक्षा के बच्चों के लिए विशेष कक्षाओं का आयोजन कर परीक्षाओं की तैयारी करवाने में शिक्षक अरुण कीर्तनीया लगातार जुटे रहते है।
वाक़ई शिक्षक अरुण कीर्तनिया का शिक्षा और अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पण की भावना के चलते आज कई छात्रों का भविष्य संवर रहा हैं ।