MahaShivratri special: तुलार गुफा जहां महादेव का जलाभिषेक करती है प्रकृति, नक्सली आतंक पर आस्था भारी

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जगदलपुर । बारसूर से 25 किलोमीटर दूर तुलार गुफा (Tular Cave) में विराजमान शिवलिंग जिसका जलाभिषेक प्रकृति करती है। कदम- कदम पर नक्सली खतरे (Naxalite) का भय भी शिव भक्तों (Shiv Bhakt) की आस्था को नहीं डिगा पाता। यहां बड़ी तादाद में लोग दर्शन के लिए जाते हैं ।

पग -पग पर परीक्षा लेते हैं भोलेनाथ :

कहते हैं कि भगवान शिव अपने भक्तों की पग -पग पर परीक्षा लेते हैं। इसका नजारा भी यहां दिखाई देता है। जहां एक ओर उफनती इंद्रावती नदी(Indravati River) इसके अलावा कई झरने और नाले दुर्गम पहाड़ शिव भक्तों का रास्ता रोके खड़े रहते हैं। उसके बाद भी भगवान भोलेनाथ के भक्त अपने आराध्य के दर्शन के लिए जाते हैं। यहां बीजापुर, गीदम, बचेली, कोडेनार और दंतेवाड़ा सहित तमाम स्थानों से लोग दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं।

कैसे पहुंचे तुलार गुफा

तुला गुफा पहुंचने के लिए बारसूर के पास कोडार घाट से इंद्रावती नदी पार करने के बाद कोशलनार वहां से मंगानार गुफा गांव होते हुए यहां तक पहुंचा जा सकता है । सातधार से मंगलनार तक कच्ची सड़क है, लेकिन आगे का रास्ता बहुत ही ज्यादा खराब है। जंगली इलाके में पैदल सफर तय करने में 5 घंटे से ज्यादा का वक्त लगता है। नक्सली आतंक के चलते पिछले 8 सालों से यहां सड़क का निर्माण नहीं कराया गया। इसके कारण सड़क की हालत बेहद खराब है ।

नक्सली आतंक का खतरा :

जैसे ही अबूझमाड़ की सीमा शुरू होती है । यहां नक्सली आतंक का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है । पग- पग पर नक्सलियों के होने का खतरा बना रहता है। इसके बावजूद भी शिव भक्तों की आस्था पर नक्सलवाद का कोई प्रभाव नहीं दिखाई देता। महाशिवरात्रि के दिन अपने देवाधिदेव महादेव का दर्शन करने लोग बड़ी तादाद में यहां पहुंचते हैं।