लबों पर छत्तीसगढ़ी गाना और हाथ में हथकरघा का ताना महिलाओं को बना रहा आत्मनिर्भर

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दल्ली राजहरा। राजहरा के एक गांव में एक घर के अंदर से हथकरघा (handloom ) चलने की आवाज के बीच छत्तीसगढ़ी गाने ( chhattisgarhi song)की बोल सुनाई दे रहे थे। नाम पूछने पर सकुचाते हुए महिला ने अपना नाम विशाखा ठाकुर बताया। उनके साथ भुनेश्वरी साहू की थीं जो उनका साथ दे रही थी । यह महिलाएं हथकरघा ( handloom) पर साड़ी की बुनाई में लगी हुई थी । विशाखा ने बताया कि हाथ से बनी हुई इन साड़ियों की काफी अच्छी मांग है , जिसके चलते वे और उनकी सहेलियां लगातार बुनाई के काम में व्यस्त रहती हैं ।छत्तीसगढ़ के हथकरघा संघ और छत्तीसगढ़ शासन ( Chhattisgarh govt.) का इन लोगों ने धन्यवाद जताया, जिसके चलते आज इनका समूह प्रगति कर रहा है । इस समूह में कुल 90. से अधिक महिलाएं बताई जा रही है। जो सभी किसी न किसी कार्य में लगी की है और सभी स्वावलंबी बन चुकी है। इसको लेकर यहां के अग्रसेन भवन ( Agrasen Bhawan) में एक कार्यक्रम भी हुआ, जिसमें महिलाओं ने लोगों को अपनी सफलता की कहानी भी सुनाई। इस कार्यक्रम में निर्मला बाई, उषा आस्टीकर, विम्मी शर्मा, फगेश्वरी, शबनम, अलका, शकुंतला, हीरा, रेणुका, अंगिता, सीमा सहित अनेक महिलाएं युवतियां शामिल थी।