भुकुस भौकाल : इस इलाज से आती है लाज

0
99
  • निखट्टू
  • बटोरन अभी भगवान का नाम लेकर पूजा का सामान बटोर ही रहे थे कि तब तक छोरन ने जय जोहारी good morning दाग दी। बोलने लगा जिससे शासन प्रशासन हारा वह है मेकाहारा, mekahara जहां मरीज बना फिरता हो बेचारा वह है मेकाहारा, जहां मरीजों को दरबान gaurds धकियाता आता हो, दर्द से कराहता मरीज petient भी विभागों के चक्कर लगाता हो, जहां दवाओं के बदले डांट पिलाई जाती हो, जहां नर्सें मरीजों पर चटकती, मंत्रियों ministers के आगे मटकती, डॉक्टरों को पकड़कर लटकती और खबरों में खटकती मिलती है। सरकार ने विशेषज्ञ डॉक्टरों का वहां भी वेतन बढ़ाया पर इनकी समझ में अभी भी कुछ नहीं आया। इतने पर भी नहीं खुली साहब की आंख, जबकि सरकार ने वेतन बढ़ा कर कर दिया 200000 ,लोग कहते हैं कि साहब सरकार तो पैसे पूरे दे रही है पर आप मरीजों को काहे नहीं हाथ लगाते। जब समाज ने दिया है दूसरे भगवान का दर्जा, तो फिर भला ऐसे मरीजों को हाथ लगाने में क्या है हर्जा, लेकिन साहब मरीजों को ना देखने पर अड़े हुए हैं और अपने वातानुकूलित कक्ष में आराम से पढ़े हुए हैं । वही इलाज की आस में आने वाला गरीब यहां से निराश होकर निजी अस्पतालों में जाता है। तो वहां बता कर तमाम है ऐब, काटी जाती है उसकी जेब, बेचारा वहां भी छला जाता है और जमीन और घर बिक गया तो बचता है। नहीं तो इस दुनिया से चला जाता है। इलाज की अव्यवस्था देखकर हमें तो लाज लगती है । गरीब यह पूछना चाहते हैं कि साहब क्या ऐसे ही होता है गरीबों का इलाज? इसके बावजूद भी दूसरा भगवान कहलाने पर आपको नहीं लगती लाज? कम से कम व्यवस्था और दूसरी चीजों से ना ही सही लेकिन ऊपर वाले से तो डरे। गरीबों का इलाज मन लगाकर करें क्योंकि अब सरकार आपको दे रही है जब पूरे पैसे तो भला इलाज आप नहीं करेंगे कैसे?
  • बटोरा ध्यान मग्न होकर सोरेन की बात को सुनने लगे और आखिर में उसकी पीठ थपथपाते हुए बोले वाह बेटा छोरा तू तो सही में बड़ा सयाना निकला बदहाल हो चुका प्रदेश का सबसे बड़ा अस्पताल असल में दूसरों से नहीं अपनों से परेशान है जिन पर अस्पताल के जिम्मेदारी है वही अस्पताल के लिए जब समस्या बन जाए तो ऐसी व्यवस्था में ऐसा ही होता है यहां तो जफर का वही शेर याद आता है कि आदमी है कि आखिर जफर यह कब दगा देके कश्ती डुबो दे जितना मल्लाह का डर है मुझको उतना तूफान का डर नहीं है